मोदीनीति:China के विशेषज्ञ ने भारत से टकराव कम करने के लिए दिया सुझाव,बोला, बर्बाद हो जाएंगे हम
रूस-चीन प्रोटोकॉल अपना कर टकराव रोक सकते हैं भारत और China’
New Delhi, : China की दादागीरी, लद्दाख में भारतीय सीमा में घुसपैठ की घटनाओं और अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के गलत रवैये से अक्सर भारत-चीन सीमा पर तनाव की स्थिति आ जाती है, अब चीन के ही एक शीर्ष एक्सपर्ट ने टकराव को रोकने के लिए उपाय बताया है। इस एक्सपर्ट के मुताबिक भारत और चीन रूस-चीन प्रोटोकॉल मॉडल को अपना कर टकराव को रोक या कम कर सकते हैं। वर्ना भारत में उग्र हो चुकी मोदी सरकार ऐसे कड़े कदम उठा सकती है की जिससे पहले से कमज़ोर हो रही चीन की अर्थव्यवस्था टूट सकती है।
अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में काफी प्रभावशाली Chinese Academy of Social Sciences (CASS) में Institute of Frontier Science के डायरेक्टर जनरल शींग ग्वांगचेंग ने कहा है कि सोवियत संघ के विघटन जैसी समस्याओँ के बावजूद चीन ने सफलता से सोवियत संघ के साथ अपनी समस्याओं का निपटारा किया। ग्वांगचेंग के मुताबिक इसी वजह से भारत और भूटान को छोड़ कर चीन के सीमा संबंधी सभी मुद्दे हल हो गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक ग्वांगचेंग ने सुझाव दिया है कि 1990 के मध्य में चीन और रूस ने सैन्य और निरस्त्रीकरण को लेकर जिन दो प्रोटोकॉल्स पर अमल किया था, उसी को दोहरा कर भारत और चीन सीमा विवाद पर टकराव से बच सकते हैं। इस बारे मे बताते हुए वो कहते हैं कि ‘बातचीत के लिए हमने रूस के साथ आपसी भरोसा कायम किया और दो महत्वपूर्ण प्रोटोकॉल लेकर आए। पहला प्रोटोकॉल 1996 में बॉर्डर एरिया मिलिट्री ट्रस्ट प्रोटोकॉल था और दूसरा निरस्त्रीकरण प्रोटोकॉल था। मुझे लगता है कि इन दोनों प्रोटोकॉल को भारत-चीन के मामले में भी लागू किया जा सकता है.’
शींग के मुताबित भारत चीन के बीच तीन विवादित क्षेत्र हैं, और किसी भी क्षेत्र में तनाव पूरी सीमा पर तनाव बढ़ा सकता है, इसीलिए ये अहम है कि आपातकीलान स्थिति से निपटने के लिए दोनों देशों को एक प्रभावी व्यवस्था अपनानी चाहिए। यहां आपको बताते चलें कि भारत और चीन ने सीमा पर टकराव को रोकने के लिए Border Defence Cooperation Agreement किया हुआ है, बावजूद इसके चीनी घुसपैठ जबतब हुआ करती है और विरोध के बाद ही चीनी सैनिक पीछे हटते हैं
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