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RTI से ख़ुलासा: सरकार ने की धर्मान्तरन प्रक्रिया में मदद। सरकारी ख़ज़ाने से दिए परिवर्तन संस्थानों को पैसे।

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RTI से यह खुलासा हुआ कि कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में सिद्धरमैया की सरकार ने बीते कुछ समय में ईसाई संस्थाओं को करोड़ो रुपये दान किए हैं. इससे सवाल उठता है कि क्या कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रही है. ये पैसे राज्य मे बने चर्च की मरम्मत और सुंदरीकरण के नाम पर दिए गए हैं. इसके अलावा बड़ी रकम नए चर्च और क्रिक्ष्चियन कम्युनिटी हॅाल बनाने के लिए दी गई है . किसी भी सेकुलर देश मे कोई सरकार धार्मिक संस्थाओं को पैसा नहीं दे सकती. यह संविधान की मूल भावना का उल्लंघन हैं. खुद को सेकुलर पार्टी बताने वाली कांग्रेस में कहीं ऐसा तो नहीं कि ईसाई संस्थाओं की जेब भरने का काम आलाकमान के इशारो पर ही हो रहा है.
ईसाई धर्म को बढ़ावा देने का एजेंडा ?
26 मार्च को RTI  के तहत 4 सवाल पूछे गए . ये सवाल सरकारी आदेश नंबर - MWD318MD2011 दिनांक 16/01/2012 के हवाले से राज्य अल्पसंख्यक विभग की तरफ से चर्च को दिए जा रहे फंड के बारे में था.
Q1. चर्च की मरम्मत के लिए सरकार की तरफ से साल दर साल कितना फंड दिया गया ?
Q2. उन ईसाई संस्थाओं  के नाम और पते बताएं जिन्हें मरम्मत के नाम पर सरकार से पैसे मिले हैं
Q3 नए चर्च बनाने पर साल दर साल राज्य सरकार ने कितने पैसे जारी किए ?
Q4.उन ईसाई संस्थाओं के नाम और पते बताएं जिन्हें नएचर्च बनाने के लिएपैसे दिए गए ?


चर्च के लिए खोला सरकारी खजाना
2013-14 में कर्नाटक सरकार ने राज्य के 134 गिरिजाघरों को 12.30 करोड़ रुपये दिए. इसके अलावा 6.72 करोड़ रुपये क्रिक्ष्चियन कम्युनिटी सेंटर बनाने के लिए दिए गए. इन कम्युनिटी सेंटरों में ही धर्मांतरण का ज्यादातर काम होता है
2014-15 में यह फंडिग और बढ़ गई . इस दौरान 125 चर्चों को 16 .56 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से दिए गए. इसी तरह 55 ईसाई समुदाय भवन बनाने के लिए करीब 15 करोड़ रुपये बांटे गए.
2015-2016 में चर्च की मरम्मत पर 15 करोड़ रुपये बांटे गए. इस दौरान कम्युनिटी सेंटर बनाने के खर्च का ब्योरा नहीं दिया गया.
  
साल दर साल चर्च की फंडिंग बढ़ती गई 
तीन साल के अंदर कांग्रेस सरकार ने चर्च को बांटे करोड़ो रुपये. अमेरिका जैसे दुनिया के बड़े - बड़े ईसाई देशों में भी सरकारें चर्च बनाने या मरम्मत करने के नाम पर एक भी पैसा नहीं देती. कई देशों में ऐसा करना गैर-कानूनी है. सेकुलर देश होने के नाते भारत मे भी कोई सरकार किसी धर्म धर्म के  पूजास्थल बनाने या मरम्मत के लिए पैसे नहीं दे सकती . जहां तक कर्नाटक सरकार का सवाल है उसने राज्य कई हिंदू मंदिरों की करोड़ो की संपत्ति सील कर रखी है. राज्य के सैकड़ो साल पुराने मंदिरों की हालत बेहद जर्जर होती जा रही है. 
कैसे अपनी जड़े जमाती हैं इसाई मिशनरियां
ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के लिए विदेशों से भारत में जड़ जमाने के लिए तमाम मिशनरीज संचालित हैं। ये हिंदु व दूसरे धर्म के लोगों को तमाम तरह के खैरात बांटकर उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। इसके लिए ये मिशनरीज उनके धर्म की बुराइयां आदि करती हैं। हिंदुओं में छुआछूत व जातिवाद की भावनाओं के नाम पर भड़काकर अपने पाले में लाने की कोशिश करती हैं। न्युज श्रोत : newsloose.com
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