सच कहावत चल रही है पूरे भारत में, इस बार मनमोहन नहीं दमदार मोदी है गद्दी पर, किया एक और कारनामा
पीएम मोदी ने कश्मीर समस्या के हल के लिए बड़ा फैसला लिया है। उनके फैसले से अलगाववादियों की नींव हिल गई है। वो तिलमिला कर रह गए हैं।
New Delhi, Sep 08: कश्मीर समस्या के समाधान के लिए मोदी सरकार लगातार कोशिशों में लगी हुई है। पिछले डेढ़ महीने से घाटी के हालात सामान्य नहीं हैं। कर्फ्यू से लोगों को परेशानी हो रही है। लेकिन हिंसा रोकने के लिए कर्फ्यू का सहारा लेना राज्य सरकार की मजबूरी है। कश्मीर समस्या हमेशा से केंद्र सरकारों के लिए परेशानी का विषय रही है। मगर मोदी सरकार जिस तरह से रणनीति बनाकर आगे बढ़ रही है उस से अलगाववादियों की नींव हिलती दिख रही है।
कश्मीर समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल घाटी में भेजा था। इस में सभी दलों के नेता थे। वो नेता भी थे जो अलगाववादियों से बातचीत के पक्षधर हैं। ये प्रतिनिधिमंडल कश्मीर में समस्या का हल खोजने के लिए गया था। इस प्रतिनिधिमंडल के साथ अलगाववादियों ने जिस तरह का व्यवहार किया उस से पीएम मोदी की चाल कामयाब होती दिख रही है।
दरअल सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जब अलगाववादियों से मिलने के लिए पहुंचा तो उन्होने मिलने से इंकार कर दिया। सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुख जैसे अलगाववादियों ने तो अपने घर का दरवाजा तक नहीं खोला था। अलगाववादियों का प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलना केंद्र सरकार के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। अब केंद्र सरकार इनके खिलाफ कड़े फैसले की नींव तैयार कर रही है।
अलगाववादियों का प्रतिनिधिमंडल से बदसलूकी पीएम मोदी के लिए रणनीतिक बढ़त है। इस से दो संदेश जनता तक जाते हैं। पहला तो ये कि अलगाववादियों का लोकतंत्र में भरोसा नहीं है। दूसरा वो कश्मीर समस्या का समाधान चाहते ही नहीं है। अब इसके पीछे मोदी सरकार की चाल भी समझ लेते हैं। केंद्र सरकार ने अलगाववादियों से बातचीत पर न तो हां कहा था और न ही इंकार किया था। प्रतिनिधिमंडल को अलगाववादियों से मिलने के लिए इसलिए नहीं रोका था। लेकिन उनके व्यवहार ने अलगाववादियों को जनता के सामने बेनकाब कर दिया।
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