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मोदी ने बिना पानी रोके नेहरू की गलती सुधारने की पहल की,70% पानी पर भारत कर सकता है कब्ज़ा

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पानी रोका तो क्रूर देश बन जाएंगे, UN सदस्यता खतरे में आएगी, बीच का रास्ता निकाल कर पाकिस्तान को औकात दिखने की कोशिशें ज़ोरों पर है। सूत्रों से पता चला है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली बैठक में इस बात पर ज़ोर रहा की नेहरू की की गई गलती यानि सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से रद्द कर के भारत को नदियों का पानी रोक लेना चाहिए और तब तक पाकिस्तान को पानी नहीं देना चाहिए जब तक आर्थिक तौर पर तबाह न हो जाये और घुटने न टेक दे।
वहीँ दूसरी और एक धड़ा इस बात को नकारते हुए कह रहा है की यदि ऐसा किया तो लाखों लोगों की जानें जाएंगी। हालाँकि युद्ध की स्तिथि में जान माल की हानि तो होगी परंतु ये सीधे तौर पर भारत को उस परिस्थिति में लेकर खड़ा कर सकता है जिसमे रूस कुछ समय पहले थे, और जिस में अमेरिका रहा है यानि क्रूर देश। और सुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्यता पाने के के लिए अग्रसर भारत ये जोखिम नहीं उठाना चाहता क्योंकि ये संधि और नदियां ही पाकिस्तान में जल आपूर्ति का एक मात्र  साधन हैं।


रिपोर्ट के हिसाब से  सरकार सिंधु और सहायक नदियों पर वर्चस्व बनाना चाहती है और इसका ज़्यादा से ज़्यादा पानी अपने लिए इस्तेमाल करना चाहती है जिससे देश में हो रही पानी की किल्लत कम हो। इस मीटिंग में NSA अजीत डोभाल, foreign secretary एस जयशंकर, और पीएमओ के कई वरिष्ठ सदस्य शामिल थे।

पूरे भारत में लगातार पाकिस्तान का पानी बंद करने की उठ रही मांग के बिच यह एहम फैसला लोगों को काफी नाराज़ कर सकता है परंतु इसके पीछे की दूरगामी सोच यदि सभी को समझ आ जाये तो शायद वो पीएम मोदी के फैसले की सराहना करने को मजबूर हो जाएं।

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