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ऐसे ही नहीं बोलते मॉडर्न चाणक्य: मोदीनीति ने देश को दिलाया खरबों का काला धन।

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नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। आईडीएस यानी आय घोषणा योजना में कुल 65,250 करोड़ रुपये का खुलासा किया गया है और कुल 64,275 लोगों ने अपनी आय घोषित की है। हालांकि इनकी गणना पूरी होने के बाद इन आंकड़ों में थोड़ी वृद्धि हो सकती है। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को यह घोषणा की। सरकार को इस रकम में से जुर्माने और कर के रूप में 30,000 करोड़ रुपये से थोड़ी कम की आय होगी।
वित्तमंत्री ने कहा कि यह योजना एक जून से 30 सितंबर की आधी रात तक चलाई गई। कर अधिकारी फिलहाल सभी ब्योरों का सारिणीकरण कर रहे हैं। इसके बाद इन आंकड़ों में अभी और वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा, “कह सकते हैं कि औसतन हर व्यक्ति ने एक करोड़ रुपये का खुलासा किया। हालांकि कुछ का ज्यादा है तो कुछ का कम है।” लेकिन जिन लोगों ने यह खुलासा किया है, उनके नामों का खुलासा करने से उन्होंने इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, “हम कर घोषणा करनेवालों के बारे में कोई जानकारी नहीं देंगे।”
वित्त मंत्री ने कहा कि इस नवीनतम योजना को सरकार द्वारा अघोषित धन को निकलवाने के लिए बनाई गई ढेर सारी योजनाओं में से एक के रूप में देखा जाना चाहिए और यह अधिक से अधिक लोगों को कर दायरे में लाने के लिए किया जाता है।
इस संबंध में उन्होंने इस तरह के मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल के गठन का उल्लेख किया और कहा कि बेनामी अधिनियम में सुधार किया गया है कि ताकि इस तरह की संपत्ति और विदेशों में जमा धन की विभिन्न एजेंसियों द्वारा बेनकाब किए जाने पर उसका कब्जा लिया जा सके।
वित्त मंत्री ने कहा, “इतनी बड़ी संख्या में लोग आठ अंकों के आंकड़ों में आय का खुलासा करने के लिए आगे आए। इसका मतलब है कि उन्होंने महसूस किया है कि कर अनुपालन से उन्हें लाभ होगा।”
जेटली ने कहा, “अन्य योजनाओं से प्राप्त राशि, और विदेशों में जमा काले धन योजना से प्राप्त राशि इस (घोषणा योजना) से प्राप्त राशि से कहीं अधिक और ऊपर है। लेकिन यह अधिक से अधिक लोगों को कर के दायरे में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसे मैं एक सकारात्मक घटना के रूप में देखता हूं।”
उन्होंने कई बार पहले भी यह स्पष्ट किया है कि नवीनतम योजना कोई आम माफी नहीं है।

उन्होंने कहा, “यह कोई माफी योजना नहीं है। इसमें कर भी चुकाना है और जुर्माना भी चुकाना है।” इस योजना के तहत आय घोषित करनेवालों को 30 प्रतिशत कर, 7.5 प्रतिशत जुर्माना और 7.5 प्रतिशत का एक अधिभार चुकाना होगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कर अधिकारियों द्वारा किसी को तंग नहीं किया जाएगा।
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