धर्मनिरपेक्ष देश? प्रशासन ने कहा मुस्लिमों की भावनायें होंगी आहत,इस बार भी मत करो दुर्गा पूजा
यह लगातार चौथा वर्ष है, जब पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित कांगलापहाड़ी गाँव के हिन्दू प्रशासन के आगे गिडगिड़ा रहे हैं कि हमें दुर्गा पूजा मना लेने दिया जाए
असल में पिछले तीन वर्ष से इस गाँव वाले अधूरी दुर्गा प्रतिमाएँ बनाकर बैठे हैं, लेकिन मुसलमानों के क्रोध और घृणा के चलते प्रशासन ने गाँववालों को दुर्गा पूजा करने से रोक रखा है...
इस वर्ष भी ग्रामीण कलेक्टर से लेकर एसपी और SDM तक मिल चुके हैं. उन्हें बता चुके हैं कि एक ग्रामीण ने जमीन दान में दे दी है, इसलिए वे किसी सार्वजनिक स्थान पर दुर्गा पूजा नहीं मनाएँगे, केवल उस निजी जमीन पर कच्चा पण्डाल लगाकर दुर्गापूजा मना लेंगे...
फिर भी प्रशासन मुस्लिमों के गुस्से और सत्ताधारी तृणमूल के नेताओं के इशारे पर दुर्गापूजा की अनुमति नहीं दे रहा है
SDM का कहना है की इलाके के मुस्लिम दुर्गा पूजा से भड़क सकते है इसलिए दुर्गा पूजा की इज़ाज़त नहीं दी जा सकती
पिछले तीन वर्ष से सभी ग्रामीण आठ किमी दूर दूसरे गाँव में जाकर दुर्गापूजा मना रहे हैं, लेकिन किसी भी "तथाकथित राष्ट्रीय चैनल" को यह खबर नहीं है... सबसे ज्यादा दुःख की बात तो यह है कि अधिकाँश ग्रामीण "दलित" हैं... लेकिन अभी तक किसी दलित चिन्तक ने इस गाँव में पहुँचकर "दलित-मुस्लिम" भाई-भाई का गीत नहीं गाया है
भारत को एक सेक्युलर देश कहा जाता है, कहाँ है अब कोर्ट और कहाँ है कानून जो हिन्दुओ के धार्मिक अधिकार की रक्षा कर सके
हिन्दुओ को भी तो देश में पूजा का अधिकार है, क्यों नहीं दखल दे रहा कानून और कोर्ट
अरे जब देश के हिन्दू ही साथ नहीं दे रहे तो कानून तो आँख मूँद कर ही बैठेगा, गिड़गिड़ा रहे है हिन्दू पर तथाकथित सेक्युलर भारत और कानून सो रहा है
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